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Bhopal


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राज्य एवं केन्द्र क्षेत्रीय योजनाएं:-

 

1. ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम:-

 

भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की मार्ग दर्शिका के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश की ग्रामीण बसाहटों में जलप्रदाय योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अभी तक भारत सरकार से प्राप्त राशि के समतुल्य राशि (50:50) राज्य शासन द्वारा भी उपलब्ध कराई जाती थी, वर्ष 2016-17 से सभी कार्यक्रमों हेतु वित्तीय ढांचे का अनुपात 60:40 (केन्द्रांश एवं राज्यांश) निर्धारित किया गया है।

राज्य शासन द्वारा बसाहटों में पेयजल प्रदाय का स्तर हैण्डपम्प योजनाओं से जलप्रदाय हेतु 55 ली. प्रति व्यक्ति प्रति दिन एवं नलजल योजनाओं के माध्यम से 70 ली. प्रति व्यक्ति प्रति दिन निर्धारित किया गया है।

प्रदेश की अधिकांश ग्रामीण जलप्रदाय योजनाएं भू-गर्भीय जल स्त्रोतों (मुख्यतः नलकूपों) पर आधारित हैं। नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप अब विभाग द्वारा अधिकाधिक मात्रा में नलजल योजनाओं का क्रियान्वयन कर घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से ग्रामीण आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि नलजल योजनाओं से पेयजल प्रदाय के वर्तमान स्तर 30 प्रतिशत को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक लाया जा सके।

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राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा जारी मार्गदर्शिका में लाभान्वित समुदाय को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वह स्वयं के लिये जलप्रदाय का स्तर स्वयं निर्धारित कर सके, इस प्रावधान के अनुसार बसाहट को पूर्णतः आच्छादित श्रेणी में वर्गीकृत करने हेतु राज्य शासन द्वारा निम्नानुसार मानदण्ड निर्धारित किये गये हैंः-

(क) ऐसी बसाहटें जिनमें प्रत्येक परिवार को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करा दिया गया हो।
(ख) प्रत्येक परिवार को उसके निवास स्थान से अधिकतम 500 मीटर की परिधि में सुरक्षित पेयजल स्त्रोत उपलब्ध करा दिया गया हो।
(ग) पहाड़ी क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को उसके निवास स्थान से अधिकतम 30 मीटर की ऊॅचाई या निचाई पर पेयजल स्त्रोत उपलब्ध करा दिया गया हो।
(घ) ऐसी बसाहटें जिनमें नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से जलप्रदाय किया जाना है, न्यूनतम मात्रा 70 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन के मान से पेयजल उपलब्ध करा दिया गया हो।

3. बसाहटों में कार्य की प्राथमिकता %& प्राथमिकताएं निम्नानुसार निर्धारित की गई हैं:-

1. पेयजल गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था।
2. ऐसी बसाहटें जिनमें जनसंख्या के मान से निर्धारित मापदण्डानुसार सुरक्षित पेयजल व्यवस्था नहीं है। (अनु.जाति/अनु.जनजाति बाहुल्य बसाहटों को प्राथमिकता)
3. शासकीय भवनयुक्त ग्रामीण शालाओं/आँगनवाड़ियों में पेयजल की व्यवस्था।
4. आदिम जाति आश्रम/छात्रावासों में पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण।

4. गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों में कार्य:- प्रदेश के कुछ जिलों के पेयजल स्रोतों में रसायनिक तत्वों की मात्रा निर्धारित मापदण्डों से अधिक पाई गई है। इनमें फ्लोराईड व लौह तत्व हैं। कुछ जिलों के पेयजल स्त्रोतों में लवणों की अधिकता के कारण खारे पानी की समस्या है। राष्ट्रीय ग्रामीण जलप्रदाय कार्यक्रम के अन्तर्गत इन पेयजल गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों में शुद्ध पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने हेतु कार्य किये जा रहे हैं।

5. ग्रामीण शालाओं एवं आँगनवाडियो में जल प्रदाय:- ग्रामीण शालाओं में पेयजल व्यवस्था एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। प्रदेश की सभी शासकीय भवन युक्त ग्रामीण शालाओं में पेयजल व्यवस्था की जा चुकी है, तथापि ऐसी शालाओं, जिनमें स्रोत असफल अथवा गुणवत्ता प्रभावित हो गए हैं, में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अन्तर्गत पेयजल व्यवस्था करने का कार्य किया जा रहा है।

6. आदिवासी उपयोजना:- आदिवासी उपयोजना क्षेत्र की बसाहटों में विभाग द्वारा वर्तमान में 55 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन के मान से पेयजल व्यवस्था के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किये जा रहे हैं। प्रदेश में आदिवासी बहुल बसाहटों में वर्ष 2016-17 में माह दिसम्बर 16 तक कुल 1686 बसाहटों में कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं, शेष बसाहटों में कार्य निरंतरित हैं।

7.अनुसूचित जाति उपयोजना:- अनुसूचित जाति उपयोजना क्षेत्र की बसाहटों में विभाग द्वारा वर्तमान में 55 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन के मान से पेयजल व्यवस्था के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किये जा रहे हैं। प्रदेश में अनुसूचित जाति बहुल बसाहटों में वर्ष 2016-17 में माह दिसंबर, 16 तक कुल 765 बसाहटों में कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं, शेष बसाहटों में कार्य निरंतरित हैं।

8. गुणवत्ता प्रभावित पेयजल स्त्रोतों वाली बसाहटों की योजनाओं का विवरणः- भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अंतर्गत फ्लोराइड, खारापानी व लौह तत्व आदि जल गुणवत्ता समस्या से प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल प्रदाय की वैकल्पिक व्यवस्था हेतु कार्य किये जा रहे हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की मार्गदर्शिका के दिशा निर्देशों के अनुसार योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु योजना लागत की 60 प्रतिशत राशि भारत सरकार द्वारा तथा 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा वहन की जा रही है।

8.1. फ्लोरोसिस नियंत्रण:- पेयजल में 1.5 मि.ग्रा./लीटर से अधिक फ्लोराइड की मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। फ्लोराइड प्रदूषित पेयजल के निरंतर सेवन से फ्लोरोसिस बीमारी हो सकती है, जिसका प्रारंभिक अवस्था में बचाव किया जा सकता है। अब तक प्रदेश की कुल 1.27 लाख बसाहटों में से प्रदेश के 27 जिलों की 6746 बसाहटों के 11460 स्त्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मानदण्ड से अधिक पाई गई थी। दिनांक 31.3.15 तक फ्लोराइड प्रभावित ऐसी 6371 बसाहटों में पेयजल के सुरक्षित स्रोत भी उपलब्ध करा दिये गये हैं, दिनांक 01.04.2016 की स्थिति में पाँच जिलों की शेष 228 बसाहटों में से 119 बसाहटों में पेयजल व्यवस्था की जा चुकी है तथा शेष 109 बसाहटों में इसी वित्तीय वर्ष में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था किये जाने के प्रयास किये जा रहे है।

8.2 खारेपन के नियंत्रण की योजनाएं:- पेयजल में कुल घुलित लवणों की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर (कोई अन्य स्रोत न होने की दशा में) है। पेयजल में उपरोक्त मात्रा से अधिक लवण होने पर पानी खारा हो जाता है। प्रदेश के 15 जिलों के 799 ग्रामों के 1889 भू-जल स्त्रोतों में खारेपन की समस्या पायी गयी थी, दिनांक 31.3.2016 तक इन बसाहटों में से 787 ग्रामों/बसाहटों में पेयजल के वैकल्पिक सुरक्षित स्रोत उपलब्ध कराये गये हैं। दिनांक 1.4.2016 की स्थिति में दो जिलों भिण्ड एवं डिण्डोरी की खारे पानी से प्रभावित शेष 12 ग्रामों/बसाहटों में भी आवश्यकतानुसार योजनाएं बनाई जाकर क्रियान्वित की जा रही हैं, कार्य निरंतरित हैं।

8.3 लौह तत्व की अधिकता का निराकरण:- पेयजल में लौहतत्व की अधिकता होने से पानी लाल-भूरा हो जाता है एवं रंग के कारण अस्वीकार्य हो जाता है। पेयजल में लौहतत्व की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.3 मिली ग्राम प्रतिलीटर है। प्रदेश के 12 जिलों की 596 बसाहटों के 884 स्रोत लौह तत्व की अधिकता से प्रभावित पाए गए थे इन अधिकांश बसाहटों में वैकल्पिक जल प्रदाय के सुरक्षित स्रोत उपलब्ध कराये गये हैं एवं जहाॅं सुरक्षित जलप्रदाय की मात्रा मानदंडों से कम है, वहां लौह तत्व प्रभावित जल स्रोतों पर लौह निष्कर्षण संयंत्र स्थापित कर शुद्ध पेयजल प्रदाय की व्यवस्था की जा रही है। दिनांक 1.4.2016 की स्थिति में दो जिलों की 32 बसाहटों में कार्य क्रियान्वित किये जा रहे।

9. भूजल संवर्धन एवं पुनर्भरण कार्यक्रम:- प्रदेश में अधोसंरचना एवं भवन निर्माण के क्षेत्र में हो रहे तीव्र विकास, जनसंख्या वृद्धि, बढ़ते हुये शहरीकरण, औद्योगीकरण तथा कृषि कार्य हेतु भूजल के अत्यधिक उपयोग में वृद्धि के फलस्वरूप उपलब्ध जल भंडारों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में असामान्य एवं असंतुलित वर्षा, भूजल पर निरंतर बढ़ती निर्भरता के कारण भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट हुई है। भूजल के निरंतर दोहन से जल गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र तथा ग्वालियर-चंबल, रीवा तथा सागर संभागों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के भूजल स्तर में सतत गिरावट परिलक्षित हुई है। भूजल स्तर में गिरावट के कारण जहां पूर्व में कुंओं से निरंतर पेयजल उपलब्ध हो जाता था, वहीं आज गहरे नलकूपों का खनन आवश्यक हो गया है।

9.1 भूजल संवर्धन एवं पुनर्भरण हेतु शासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम सभा की सहमति से तैयार की गई भूजल संवर्धन एवं पुनर्भरण योजनाओं को स्वीकृत करने के लिये प्राथमिकता का निर्धारण जिला जल एवं स्वच्छता समिति, जिसके अध्यक्ष जिले के कलेक्टर हैं, के द्वारा किया जाता है और स्वीकृति पश्चात् योजनाओं का क्रियान्वयन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

10. नगरीय पेयजल कार्यक्रम:-

10.1 कार्यक्रम और उपलब्धियां:- सामान्यतः प्रदेश की नगरीय योजनाओं का क्रियान्वयन एवं संचालन/संधारण नगरीय निकायों द्वारा किया जाता है। प्रदेश की केवल 2 जल प्रदाय योजनाओं क्रमशः सीधी एवं झाबुआ को छोडकर शेष सभी नगरीय योजनाऐं संबंधित नगरीय निकायों द्वारा संचालित- संधारित की जा रही हैं ।

10.2 सामान्य नगरीय जलप्रदाय योजना कार्यक्रम:- नगरीय जल प्रदाय योजना कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वीकृत छिन्दवाड़ा शहर की पेंचव्हेली समूह जल प्रदाय योजना का क्रियान्वयन विभाग द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में उक्त योजना के स्रोत मंधान बाँध का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा योजनान्तर्गत स्वीकृत शेष सभी अवयव पूर्ण किये जा चुके हैं ।

10.3 नगरीय मल जल निकास योजनाएं:- ग्वालियर नगर की मल जल निकास योजना, पुनरीक्षित लागत रूपये 58.50 करोड़ के लगभग 98 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गये है तथा शेष कार्य प्रगति पर हैं।

10.4 निक्षेप मद में विभाग द्वारा क्रियान्वित नगरीय योजनाऐं:- सागर जिले के खुरई नगर एवं औद्योगिक क्षेत्र सिदगुवां की जल प्रदाय योजनायें निक्षेप मद में क्रमशः रुपये 3138.00 लाख एवं रुपये 1035.00 लाख की लागत से विभाग द्वारा क्रियान्वित की गयी हैं। जिसमें से खुरई नगर की जल प्रदाय योजना निश्चित समयावधि में पूर्ण कर दी गई एवं औद्योगिक क्षेत्र सिदगुवां की योजना का कार्य प्रगति पर है ।

10.5 राष्ट्रीय नदी/झील संरक्षण योजना कार्यक्रम:- इस कार्यक्रम के अन्तर्गत निक्षेप कार्य के रूप में विभाग द्वारा 2 योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है जिनकी कुल लागत राशि रूपये 7571.00 लाख है ।